श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.21

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

बृहस्पतिरुवाच

ईक्षांचक्रे यदा कृष्णो मायापुरुषरूपधृक्।

ब्रह्मा विष्णुः शिवश्‍चापि रजःसत्त्वतमोगुणैः॥ २१

īkṣāṃcakre yadā kṛṣṇo māyāpuruṣarūpadhṛk|

brahmā viṣṇuḥ śivaścāpi rajaḥsattvatamoguṇaiḥ|| 21

अर्थ

बृहस्पतिजीने कहा था—अपनी मायासे पुरुषरूप धारण करनेवाले भगवान् श्रीकृष्णने जब सृष्टिके लिये संकल्प किया, तब उनके दिव्य विग्रहसे तीन पुरुष प्रकट हुए। इनमें रजोगुणकी प्रधानतासे ब्रह्मा, सत्त्वगुणकी प्रधानतासे विष्णु और तमोगुणकी प्रधानतासे रुद्र प्रकट हुए। भगवान्‌ने इन तीनोंको क्रमशः जगत‍्की उत्पत्ति, पालन और संहार करनेका अधिकार प्रदान किया॥ २१-२२॥

यह अर्थ श्लोक 21–22 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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