श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.37

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अधिकारे स्थितो विष्णुर्लक्ष्मीर्निश्‍चिन्तमानसा।

तेन भागवतास्वादस्तस्या भूरि प्रकाशते॥ ३७

adhikāre sthito viṣṇurlakṣmīrniścintamānasā|

tena bhāgavatāsvādastasyā bhūri prakāśate|| 37

अर्थ

इसका कारण यह है कि विष्णु तो अधिकारारूढ हैं, उन्हें जगत‍्के पालनकी चिन्ता करनी पड़ती है; पर लक्ष्मीजी इन झंझटोंसे अलग हैं, अतः उनका हृदय निश्‍चिन्त है। इसीसे लक्ष्मीजीके मुखसे भागवतकथाका रसास्वादन अधिक प्रकाशित होता है। इसके पश्‍चात् रुद्रने भी, जिन्हें भगवान्‌ने पहले संहारकार्यमें लगाया था, अपनी सामर्थ्यकी वृद्धिके लिये उन परमपुरुष भगवान् श्रीकृष्णसे प्रार्थना की॥ ३७-३८॥

यह अर्थ श्लोक 37–38 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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