श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.39

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

रुद्र उवाच

नित्ये नैमित्तिके चैव संहारे प्राकृते तथा।

शक्तयो मम विद्यन्ते देवदेव मम प्रभो॥ ३९

nitye naimittike caiva saṃhāre prākṛte tathā|

śaktayo mama vidyante devadeva mama prabho|| 39

अर्थ

रुद्रने कहा—मेरे प्रभु देवदेव! मुझमें नित्य, नैमित्तिक और प्राकृत संहारकी शक्तियाँ तो हैं, पर आत्यन्तिक संहारकी शक्ति बिलकुल नहीं है। यह मेरे लिये बड़े दुःखकी बात है। इसी कमीकी पूर्तिके लिये मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ॥ ३९-४०॥

यह अर्थ श्लोक 39–40 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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