बृहस्पतिजी कहते हैं—रुद्रकी प्रार्थना सुनकर नारायणने उन्हें भी श्रीमद्भागवतका ही उपदेश किया। सदाशिव रुद्रने एक वर्षमें एक पारायणके क्रमसे भागवतकथाका सेवन किया। इसके सेवनसे उन्होंने तमोगुणपर विजय पायी और आत्यन्तिक संहार (मोक्ष) की शक्ति भी प्राप्त कर ली॥ ४१-४२॥
यह अर्थ श्लोक 41–42 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
कथा भागवती तेन सेविता वर्षमात्रतः।
लये त्वात्यन्तिके तेनावाप शक्तिं सदाशिवः॥ ४२
बृहस्पतिजी कहते हैं—रुद्रकी प्रार्थना सुनकर नारायणने उन्हें भी श्रीमद्भागवतका ही उपदेश किया। सदाशिव रुद्रने एक वर्षमें एक पारायणके क्रमसे भागवतकथाका सेवन किया। इसके सेवनसे उन्होंने तमोगुणपर विजय पायी और आत्यन्तिक संहार (मोक्ष) की शक्ति भी प्राप्त कर ली॥ ४१-४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 998) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/42/