श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.42

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

कथा भागवती तेन सेविता वर्षमात्रतः।

लये त्वात्यन्तिके तेनावाप शक्तिं सदाशिवः॥ ४२

kathā bhāgavatī tena sevitā varṣamātrataḥ|

laye tvātyantike tenāvāpa śaktiṃ sadāśivaḥ|| 42

अर्थ

बृहस्पतिजी कहते हैं—रुद्रकी प्रार्थना सुनकर नारायणने उन्हें भी श्रीमद्भागवतका ही उपदेश किया। सदाशिव रुद्रने एक वर्षमें एक पारायणके क्रमसे भागवतकथाका सेवन किया। इसके सेवनसे उन्होंने तमोगुणपर विजय पायी और आत्यन्तिक संहार (मोक्ष) की शक्ति भी प्राप्त कर ली॥ ४१-४२॥

यह अर्थ श्लोक 41–42 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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