श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.53

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

परीक्षिदुवाच

आज्ञाप्योऽहं यथा कार्यः सहायोऽत्र मया तथा।

सूत उवाच

श्रुत्वैतदुद्धवो वाक्यमुवाच प्रीतमानसः॥ ५३

śrutvaitaduddhavo vākyamuvāca prītamānasaḥ|| 53

अर्थ

सूतजी कहते हैं—परीक्षित‍्का यह वचन सुनकर उद्धवजी मन-ही-मन बहुत प्रसन्‍न हुए और बोले॥ ५३॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें