श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.63

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

नन्दनन्दनरूपस्तु श्रीशुको भगवानृषिः।

श्रीमद्भागवतं तुभ्यं श्रावयिष्यत्यसंशयम्॥ ६३

nandanandanarūpastu śrīśuko bhagavānṛṣiḥ|

śrīmadbhāgavataṃ tubhyaṃ śrāvayiṣyatyasaṃśayam|| 63

अर्थ

महर्षि भगवान् श्रीशुकदेवजी साक्षात् नन्दनन्दन श्रीकृष्णके स्वरूप हैं, वे ही तुम्हें श्रीमद्भागवतकी कथा सुनायेंगे; इसमें तनिक भी सन्देहकी बात नहीं है॥ ६३॥

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