सूतजी कहते हैं—उद्धवजीके इस प्रकार कहनेपर राजा परीक्षित्ने उनकी परिक्रमा करके उन्हें प्रणाम किया और दिग्विजयके लिये चले गये॥ ६५॥
इत्युक्तस्तं परिक्रम्य गतो राजा दिशां जये॥ ६५
सूतजी कहते हैं—उद्धवजीके इस प्रकार कहनेपर राजा परीक्षित्ने उनकी परिक्रमा करके उन्हें प्रणाम किया और दिग्विजयके लिये चले गये॥ ६५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.65 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1001) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/65/