श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.1

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अथ चतुर्थोऽध्यायः

श्रीमद्भागवतका स्वरूप, प्रमाण, श्रोता-वक्ताके लक्षण, श्रवणविधि और माहात्म्य

ऋषय ऊचुः

साधु सूत चिरं जीव चिरमेवं प्रशाधि नः।

श्रीभागवतमाहात्म्यमपूर्वं त्वन्मुखाच्छ्रुतम्॥ १

sādhu sūta ciraṃ jīva ciramevaṃ praśādhi naḥ|

śrībhāgavatamāhātmyamapūrvaṃ tvanmukhācchrutam|| 1

अर्थ

शौनकादि ऋषियोंने कहा—सूतजी! आपने हमलोगोंको बहुत अच्छी बात बतायी। आपकी आयु बढ़े, आप चिरजीवी हों और चिरकालतक हमें इसी प्रकार उपदेश करते रहें। आज हमलोगोंने आपके मुखसे श्रीमद्भागवतका अपूर्व माहात्म्य सुना है॥ १॥

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