शौनकादि ऋषियोंने कहा—सूतजी! आपने हमलोगोंको बहुत अच्छी बात बतायी। आपकी आयु बढ़े, आप चिरजीवी हों और चिरकालतक हमें इसी प्रकार उपदेश करते रहें। आज हमलोगोंने आपके मुखसे श्रीमद्भागवतका अपूर्व माहात्म्य सुना है॥ १॥
साधु सूत चिरं जीव चिरमेवं प्रशाधि नः।
श्रीभागवतमाहात्म्यमपूर्वं त्वन्मुखाच्छ्रुतम्॥ १
शौनकादि ऋषियोंने कहा—सूतजी! आपने हमलोगोंको बहुत अच्छी बात बतायी। आपकी आयु बढ़े, आप चिरजीवी हों और चिरकालतक हमें इसी प्रकार उपदेश करते रहें। आज हमलोगोंने आपके मुखसे श्रीमद्भागवतका अपूर्व माहात्म्य सुना है॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1002) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/1/