श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.11

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

प्रवराश्‍चातको हंसः शुको मीनादयस्तथा।

अवरा वृकभूरुण्डवृषोष्ट्राद्याः प्रकीर्तिताः॥ ११

pravarāścātako haṃsaḥ śuko mīnādayastathā|

avarā vṛkabhūruṇḍavṛṣoṣṭrādyāḥ prakīrtitāḥ|| 11

अर्थ

प्रवर श्रोताओंके ‘चातक’, ‘हंस’, ‘शुक’ और ‘मीन’ आदि कई भेद हैं। अवरके भी ‘वृक’, ‘भूरुण्ड’, ‘वृष’ और ‘उष्ट्र’ आदि अनेकों भेद बतलाये गये हैं॥ ११॥

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