॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.4.11
प्रवराश्चातको हंसः शुको मीनादयस्तथा।
अवरा वृकभूरुण्डवृषोष्ट्राद्याः प्रकीर्तिताः॥ ११
pravarāścātako haṃsaḥ śuko mīnādayastathā|
avarā vṛkabhūruṇḍavṛṣoṣṭrādyāḥ prakīrtitāḥ|| 11
अर्थ
प्रवर श्रोताओंके ‘चातक’, ‘हंस’, ‘शुक’ और ‘मीन’ आदि कई भेद हैं। अवरके भी ‘वृक’, ‘भूरुण्ड’, ‘वृष’ और ‘उष्ट्र’ आदि अनेकों भेद बतलाये गये हैं॥ ११॥