॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.4.19
स उष्ट्रो मधुरं मुञ्चन् विपरीते रमेत यः।
यथा निम्बं चरत्युष्ट्रो हित्वाम्रमपि तद्युतम्॥ १९
sa uṣṭro madhuraṃ muñcan viparīte rameta yaḥ|
yathā nimbaṃ caratyuṣṭro hitvāmramapi tadyutam|| 19
अर्थ
जिस प्रकार ऊँट माधुर्यगुणसे युक्त आमको भी छोड़कर केवल नीमकी ही पत्ती चबाता है, उसी प्रकार जो भगवान्की मधुर कथाको छोड़कर उसके विपरीत संसारी बातोंमें रमता रहता है, उसे ‘ऊँट’ कहते हैं॥ १९॥