विप्रगण! अब मैं भारतवर्षकी भूमिपर श्रीमद्भागवत-कथाका सेवन करनेके लिये जो आवश्यक विधि है, उसे बतलाता हूँ; आप सुनें। इस विधिके पालनसे श्रोताकी सुख-परम्पराका विस्तार होता है॥ २३॥
अथ भारतभूस्थाने श्रीभागवतसेवने।
विधिं शृणुत भो विप्रा येन स्यात् सुखसन्ततिः॥ २३
विप्रगण! अब मैं भारतवर्षकी भूमिपर श्रीमद्भागवत-कथाका सेवन करनेके लिये जो आवश्यक विधि है, उसे बतलाता हूँ; आप सुनें। इस विधिके पालनसे श्रोताकी सुख-परम्पराका विस्तार होता है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1005) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/4/23/