ब्रह्मणे हरिणा तद्दिक् चतुःश्लोक्या प्रदर्शिता॥ ६
pramāṇaṃ tasya ko veda hyanantasyākṣarātmanaḥ|
brahmaṇe hariṇā taddik catuḥślokyā pradarśitā|| 6
अर्थ
श्रीमद्भागवत अनन्त, अक्षरस्वरूप है; इसका नियत प्रमाण भला कौन जान सकता है? पूर्वकालमें भगवान् विष्णुने ब्रह्माजीके प्रति चार श्लोकोंमें इसका दिग्दर्शनमात्र कराया था॥ ६॥
प्रमाणं तस्य को वेद ह्यनन्तस्याक्षरात्मनः।
ब्रह्मणे हरिणा तद्दिक् चतुःश्लोक्या प्रदर्शिता॥ ६
श्रीमद्भागवत अनन्त, अक्षरस्वरूप है; इसका नियत प्रमाण भला कौन जान सकता है? पूर्वकालमें भगवान् विष्णुने ब्रह्माजीके प्रति चार श्लोकोंमें इसका दिग्दर्शनमात्र कराया था॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1002) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/4/6/