vīkṣantaḥ snehasambaddhā vicelustatra tatra ha|| 13
अर्थ
उनका चित्त द्रवित हो रहा था, वे सब निर्निमेष नेत्रोंसे भगवान्को देखते हुए स्नेहबन्धनसे बँधकर जहाँ-तहाँ दौड़ रहे थे॥ १३॥✎ 7576
सर्वे तेऽनिमिषैरक्षैस्तमनुद्रुतचेतसः।
वीक्षन्तः स्नेहसम्बद्धा विचेलुस्तत्र तत्र ह॥ १३
उनका चित्त द्रवित हो रहा था, वे सब निर्निमेष नेत्रोंसे भगवान्को देखते हुए स्नेहबन्धनसे बँधकर जहाँ-तहाँ दौड़ रहे थे॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.10.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 126) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/10/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)