॥ श्रीहरिः ॥
अथाविशत् स्वभवनं सर्वकाममनुत्तमम्।
प्रासादा यत्र पत्नीनां सहस्राणि च षोडश॥ ३०
athāviśat svabhavanaṃ sarvakāmamanuttamam|
prāsādā yatra patnīnāṃ sahasrāṇi ca ṣoḍaśa|| 30
अर्थ
माताओंसे आज्ञा लेकर वे अपने समस्त भोग-सामग्रियोंसे सम्पन्न सर्वश्रेष्ठ भवनमें गये। उसमें सोलह हजार पत्नियोंके अलग-अलग महल थे॥ ३०॥
अथाविशत् स्वभवनं सर्वकाममनुत्तमम्।
प्रासादा यत्र पत्नीनां सहस्राणि च षोडश॥ ३०
माताओंसे आज्ञा लेकर वे अपने समस्त भोग-सामग्रियोंसे सम्पन्न सर्वश्रेष्ठ भवनमें गये। उसमें सोलह हजार पत्नियोंके अलग-अलग महल थे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.11.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 133) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/11/30/