श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.21

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

धन्विनामग्रणीरेष तुल्यश्चार्जुनयोर्द्वयोः।

हुताश इव दुर्धर्षः समुद्र इव दुस्तरः॥ २१

dhanvināmagraṇīreṣa tulyaścārjunayordvayoḥ|

hutāśa iva durdharṣaḥ samudra iva dustaraḥ|| 21

अर्थ

धनुर्धरोंमें यह सहस्रबाहु अर्जुन और अपने दादा पार्थके समान अग्रगण्य होगा। यह अग्‍निके समान दुर्धर्ष और समुद्रके समान दुस्तर होगा॥ २१॥✎ 86

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #86 शब्दोंके बीचका स्थान: होगा॥१९॥ → होगा॥ १९॥

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