श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.31

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

स राजपुत्रो ववृधे आशु शुक्ल इवोडुपः।

आपूर्यमाणः पितृभिः काष्ठाभिरिव सोऽन्वहम्॥ ३१

sa rājaputro vavṛdhe āśu śukla ivoḍupaḥ|

āpūryamāṇaḥ pitṛbhiḥ kāṣṭhābhiriva so'nvaham|| 31

अर्थ

जैसे शुक्लपक्षमें दिन-प्रतिदिन चन्द्रमा अपनी कलाओंसे पूर्ण होता हुआ बढ़ता है, वैसे ही वह राजकुमार भी अपने गुरुजनोंके लालन-पालनसे क्रमशः अनुदिन बढ़ता हुआ शीघ्र ही सयाना हो गया॥ ३१॥

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