॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.13.12
इत्युक्तो धर्मराजेन सर्वं तत् समवर्णयत्।
यथानुभूतं क्रमशो१ विना यदुकुलक्षयम्॥ १२
ityukto dharmarājena sarvaṃ tat samavarṇayat|
yathānubhūtaṃ kramaśo vinā yadukulakṣayam|| 12
अर्थ
युधिष्ठिरके इस प्रकार पूछनेपर विदुरजीने तीर्थों और यदुवंशियोंके सम्बन्धमें जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया था, सब क्रमसे बतला दिया, केवल यदुवंशके विनाशकी बात नहीं कही॥ १२॥
टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—भ्रमतो।