श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.12

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

इत्युक्तो धर्मराजेन सर्वं तत् समवर्णयत्।

यथानुभूतं क्रमशो१ विना यदुकुलक्षयम्॥ १२

ityukto dharmarājena sarvaṃ tat samavarṇayat|

yathānubhūtaṃ kramaśo vinā yadukulakṣayam|| 12

अर्थ

युधिष्ठिरके इस प्रकार पूछनेपर विदुरजीने तीर्थों और यदुवंशियोंके सम्बन्धमें जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया था, सब क्रमसे बतला दिया, केवल यदुवंशके विनाशकी बात नहीं कही॥ १२॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—भ्रमतो।

    (मुद्रित पृष्ठ 140)

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