श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.39

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

कर्णधार इवापारे भगवान् पारदर्शकः।

अथाबभाषे भगवान् नारदो मुनिसत्तमः॥ ३९

karṇadhāra ivāpāre bhagavān pāradarśakaḥ|

athābabhāṣe bhagavān nārado munisattamaḥ|| 39

अर्थ

भगवन्! अपार समुद्रमें कर्णधारके समान आप ही हमारे पारदर्शक हैं।’ तब भगवान्‌के परमभक्त भगवन्मय देवर्षि नारदने कहा—॥ ३९॥✎ 91

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #91 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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