श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.13

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

शस्ताः कुर्वन्ति मां सव्यं दक्षिणं पशवोऽपरे।

वाहांश्‍च पुरुषव्याघ्र लक्षये रुदतो मम॥ १३

śastāḥ kurvanti māṃ savyaṃ dakṣiṇaṃ paśavo'pare|

vāhāṃśca puruṣavyāghra lakṣaye rudato mama|| 13

अर्थ

भीमसेन! गौ आदि अच्छे पशु मुझे अपने बायें करके जाते हैं और गधे आदि बुरे पशु मुझे अपने दाहिने कर देते हैं। मेरे घोड़े आदि वाहन मुझे रोते हुए दिखायी देते हैं॥ १३॥✎ 93

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #93 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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