शरीरको छेदनेवाली एवं धूलिवर्षासे अंधकार फैलानेवाली आँधी चलने लगी है। बादल बड़ा डरावना दृश्य उपस्थित करके सब ओर खून बरसाते हैं॥ १६॥✎ 93
वायुर्वाति खरस्पर्शो रजसा विसृजंस्तमः।
असृग् वर्षन्ति जलदा बीभत्समिव सर्वतः॥ १६
शरीरको छेदनेवाली एवं धूलिवर्षासे अंधकार फैलानेवाली आँधी चलने लगी है। बादल बड़ा डरावना दृश्य उपस्थित करके सब ओर खून बरसाते हैं॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 147) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)