॥ श्रीहरिः ॥
व्यतीताः कतिचिन्मासास्तदा ना२यात्ततोऽर्जुनः।
ददर्श घोररूपाणि निमित्तानि कुरूद्वहः३॥ २
vyatītāḥ katicinmāsāstadā nāyāttato'rjunaḥ|
dadarśa ghorarūpāṇi nimittāni kurūdvahaḥ|| 2
अर्थ
कई महीने बीत जानेपर भी अर्जुन वहाँसे लौटकर नहीं आये। धर्मराज युधिष्ठिरको बड़े भयंकर अपशकुन दीखने लगे॥ २॥
व्यतीताः कतिचिन्मासास्तदा नायात्ततोऽर्जुनः।
ददर्श घोररूपाणि निमित्तानि कुरूद्वहः॥ २
कई महीने बीत जानेपर भी अर्जुन वहाँसे लौटकर नहीं आये। धर्मराज युधिष्ठिरको बड़े भयंकर अपशकुन दीखने लगे॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 146) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/14/2/टिप्पणियाँ
- २
प्रा० पा०—पाण्डुसुतो नृपः।
(मुद्रित पृष्ठ 146) - ३
प्रा० पा०—भृगूद्वह।
(मुद्रित पृष्ठ 146)