श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.28

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

कच्चिद्राजाऽऽहुको जीवत्यसत्पुत्रोऽस्य चानुजः।

हृदीकः ससुतोऽक्रूरो जयन्तगदसारणाः॥ २८

kaccidrājā''huko jīvatyasatputro'sya cānujaḥ|

hṛdīkaḥ sasuto'krūro jayantagadasāraṇāḥ|| 28

अर्थ

जिनका पुत्र कंस बड़ा ही दुष्ट था, वे राजा उग्रसेन अपने छोटे भाई देवकके साथ जीवित तो हैं न? हृदीक, उनके पुत्र कृतवर्मा, अक्रूर, जयन्त, गद, सारण तथा शत्रुजित् आदि यादववीर सकुशल हैं न? यादवोंके प्रभु बलरामजी तो आनन्दसे हैं?॥ २८-२९॥

यह अर्थ श्लोक 28–29 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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