॥ श्रीहरिः ॥
भगवानपि गोविन्दो ब्रह्मण्यो भक्तवत्सलः।
कच्चित्पुरे सुधर्मायां सुखमास्ते सुहृद्वृतः॥ ३४
bhagavānapi govindo brahmaṇyo bhaktavatsalaḥ|
kaccitpure sudharmāyāṃ sukhamāste suhṛdvṛtaḥ|| 34
अर्थ
भक्तवत्सल ब्राह्मणभक्त भगवान् श्रीकृष्ण अपने स्वजनोंके साथ द्वारकाकी सुधर्मा सभामें सुखपूर्वक विराजते हैं न?॥ ३४॥
भगवानपि गोविन्दो ब्रह्मण्यो भक्तवत्सलः।
कच्चित्पुरे सुधर्मायां सुखमास्ते सुहृद्वृतः॥ ३४
भक्तवत्सल ब्राह्मणभक्त भगवान् श्रीकृष्ण अपने स्वजनोंके साथ द्वारकाकी सुधर्मा सभामें सुखपूर्वक विराजते हैं न?॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 149) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/34/