श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.8

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अपि देवर्षिणाऽऽदिष्टः स कालोऽयमुपस्थितः।

यदाऽऽत्मनोऽङ्गमाक्रीडं भगवानुत्सिसृक्षति॥ ८

api devarṣiṇā''diṣṭaḥ sa kālo'yamupasthitaḥ|

yadā''tmano'ṅgamākrīḍaṃ bhagavānutsisṛkṣati|| 8

अर्थ

कहीं देवर्षि नारदके द्वारा बतलाया हुआ वह समय तो नहीं आ पहुँचा है, जिसमें भगवान् श्रीकृष्ण अपने लीला-विग्रहका संवरण करना चाहते हैं?॥ ८॥✎ 93

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #93 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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