सूतजी कहते हैं—अहो! विलोम* जातिमें उत्पन्न होनेपर भी महात्माओंकी सेवा करनेके कारण आज हमारा जन्म सफल हो गया। क्योंकि महापुरुषोंके साथ बातचीत करनेमात्रसे ही नीच कुलमें उत्पन्न होनेकी मनोव्यथा शीघ्र ही मिट जाती है॥ १८॥
अहो वयं जन्मभृतोऽद्य हास्म
वृद्धानुवृत्त्यापि विलोमजाताः।
दौष्कुल्यमाधिं विधुनोति शीघ्रं
महत्तमानामभिधानयोगः ॥ १८
सूतजी कहते हैं—अहो! विलोम जातिमें उत्पन्न होनेपर भी महात्माओंकी सेवा करनेके कारण आज हमारा जन्म सफल हो गया। क्योंकि महापुरुषोंके साथ बातचीत करनेमात्रसे ही नीच कुलमें उत्पन्न होनेकी मनोव्यथा शीघ्र ही मिट जाती है॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 170) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/18/18/
टिप्पणियाँ
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उच्च वर्णकी माता और निम्न वर्णके पितासे उत्पन्न संतानको ‘विलोमज’ कहते हैं। सूत जातिकी उत्पत्ति इसी प्रकार ब्राह्मणी माता और क्षत्रिय पिताके द्वारा होनेसे उसे शास्त्रोंमें विलोम जाति माना गया है।