श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.24

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

एकदा धनुरुद्यम्य विचरन् मृगयां वने।

मृगाननुगतः श्रान्तः क्षुधितस्तृषितो भृशम्॥ २४

ekadā dhanurudyamya vicaran mṛgayāṃ vane|

mṛgānanugataḥ śrāntaḥ kṣudhitastṛṣito bhṛśam|| 24

अर्थ

एक दिन राजा परीक्षित् धनुष लेकर वनमें शिकार खेलने गये हुए थे। हरिणोंके पीछे दौड़ते-दौड़ते वे थक गये और उन्हें बड़े जोरकी भूख और प्यास लगी॥ २४॥

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