एक दिन राजा परीक्षित् धनुष लेकर वनमें शिकार खेलने गये हुए थे। हरिणोंके पीछे दौड़ते-दौड़ते वे थक गये और उन्हें बड़े जोरकी भूख और प्यास लगी॥ २४॥
एकदा धनुरुद्यम्य विचरन् मृगयां वने।
मृगाननुगतः श्रान्तः क्षुधितस्तृषितो भृशम्॥ २४
एक दिन राजा परीक्षित् धनुष लेकर वनमें शिकार खेलने गये हुए थे। हरिणोंके पीछे दौड़ते-दौड़ते वे थक गये और उन्हें बड़े जोरकी भूख और प्यास लगी॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 171) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/18/24/