श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.49

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

इति पुत्रकृताघेन सोऽनुतप्तो महामुनिः।

स्वयं विप्रकृतो राज्ञा नैवाघं तदचिन्तयत्॥ ४९

iti putrakṛtāghena so'nutapto mahāmuniḥ|

svayaṃ viprakṛto rājñā naivāghaṃ tadacintayat|| 49

अर्थ

महामुनि शमीकको पुत्रके अपराधपर बड़ा पश्चात्ताप हुआ। राजा परीक्षित‍्ने जो उनका अपमान किया था, उसपर तो उन्होंने ध्यान ही नहीं दिया॥ ४९॥

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