जबतक पृथ्वीपर अभिमन्युनन्दन महाराज परीक्षित् सम्राट् रहे, तबतक चारों ओर व्याप्त हो जानेपर भी कलियुगका कुछ भी प्रभाव नहीं था॥ ५॥✎ 109
तावत्कलिर्न प्रभवेत् प्रविष्टोऽपीह सर्वतः।
यावदीशो महानुर्व्यामाभिमन्यव एकराट्॥ ५
जबतक पृथ्वीपर अभिमन्युनन्दन महाराज परीक्षित् सम्राट् रहे, तबतक चारों ओर व्याप्त हो जानेपर भी कलियुगका कुछ भी प्रभाव नहीं था॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 168) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/18/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)