श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.18

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

एवं च तस्मिन्‍नरदेवदेवे

प्रायोपविष्टे दिवि देवसङ्घाः।

प्रशस्य भूमौ व्यकिरन् प्रसूनै-

र्मुदा मुहुर्दुन्दुभयश्‍च नेदुः॥ १८

evaṃ ca tasminnaradevadeve

prāyopaviṣṭe divi devasaṅghāḥ|

praśasya bhūmau vyakiran prasūnai-

rmudā muhurdundubhayaśca neduḥ|| 18

अर्थ

पृथ्वीके एकच्छत्र सम्राट् परीक्षित् जब इस प्रकार आमरण अनशनका निश्‍चय करके बैठ गये, तब आकाशमें स्थित देवतालोग बड़े आनन्दसे उनकी प्रशंसा करते हुए वहाँ पृथ्वीपर पुष्पोंकी वर्षा करने लगे तथा उनके नगारे बार-बार बजने लगे॥ १८॥

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