श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.32

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

परीक्षिदुवाच

अहो अद्य वयं ब्रह्मन् सत्सेव्याः क्षत्रबन्धवः।

कृपयातिथिरूपेण भवद्भिस्तीर्थकाः कृताः॥ ३२

aho adya vayaṃ brahman satsevyāḥ kṣatrabandhavaḥ|

kṛpayātithirūpeṇa bhavadbhistīrthakāḥ kṛtāḥ|| 32

अर्थ

परीक्षित‍्ने कहा—ब्रह्मस्वरूप भगवन्! आज हम बड़भागी हुए; क्योंकि अपराधी क्षत्रिय होनेपर भी हमें संत-समागमका अधिकारी समझा गया। आज कृपापूर्वक अतिथिरूपसे पधारकर आपने हमें तीर्थके तुल्य पवित्र बना दिया ॥ ३२॥

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