श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.37

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

अतः पृच्छामि संसिद्धिं योगिनां परमं गुरुम्।

पुरुषस्येह यत्कार्यं म्रियमाणस्य सर्वथा॥ ३७

ataḥ pṛcchāmi saṃsiddhiṃ yogināṃ paramaṃ gurum|

puruṣasyeha yatkāryaṃ mriyamāṇasya sarvathā|| 37

अर्थ

आप योगियोंके परम गुरु हैं, इसलिये मैं आपसे परम सिद्धिके स्वरूप और साधनके सम्बन्धमें प्रश्न कर रहा हूँ। जो पुरुष सर्वथा मरणासन्‍न है, उसको क्या करना चाहिये?॥ ३७॥

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