श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.8

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तत्रोपजग्मुर्भुवनं पुनाना

महानुभावा मुनयः सशिष्याः।

प्रायेण तीर्थाभिगमापदेशैः

स्वयं हि तीर्थानि पुनन्ति सन्तः॥ ८

tatropajagmurbhuvanaṃ punānā

mahānubhāvā munayaḥ saśiṣyāḥ|

prāyeṇa tīrthābhigamāpadeśaiḥ

svayaṃ hi tīrthāni punanti santaḥ|| 8

अर्थ

उस समय त्रिलोकीको पवित्र करनेवाले बड़े-बड़े महानुभाव ऋषि-मुनि अपने शिष्योंके साथ वहाँ पधारे। संतजन प्रायः तीर्थयात्राके बहाने स्वयं उन तीर्थस्थानोंको ही पवित्र करते हैं॥ ८॥

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