श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.24

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

ततः कलौ सम्प्रवृत्ते सम्मोहाय सुरद्विषाम्।

बुद्धो नाम्नाजनसुतः कीकटेषु भविष्यति॥ २४

tataḥ kalau sampravṛtte sammohāya suradviṣām|

buddho nāmnājanasutaḥ kīkaṭeṣu bhaviṣyati|| 24

अर्थ

उसके बाद कलियुग आ जानेपर मगधदेश (बिहार)-में देवताओंके द्वेषी दैत्योंको मोहित करनेके लिये अजनके पुत्ररूपमें आपका बुद्धावतार होगा॥ २४॥

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