श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.30

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

एतद्रूपं भगवतो ह्यरूपस्य चिदात्मनः।

मायागुणैर्विरचितं महदादिभिरात्मनि॥ ३०

etadrūpaṃ bhagavato hyarūpasya cidātmanaḥ|

māyāguṇairviracitaṃ mahadādibhirātmani|| 30

अर्थ

प्राकृत स्वरूपरहित चिन्मय भगवान्‌का जो यह स्थूल जगदाकार रूप है, यह उनकी मायाके महत्तत्त्वादि गुणोंसे भगवान्‌में ही कल्पित है॥ ३०॥✎ 32

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #32 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में

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