श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.43

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

प्रायोपविष्टं गंगायां परीतं परमर्षिभिः।

कृष्णे स्वधामोपगते धर्मज्ञानादिभिः सह॥ ४३

prāyopaviṣṭaṃ gaṃgāyāṃ parītaṃ paramarṣibhiḥ|

kṛṣṇe svadhāmopagate dharmajñānādibhiḥ saha|| 43

अर्थ

उस समय वे परमर्षियोंसे घिरे हुए आमरण अनशनका व्रत लेकर गंगातटपर बैठे हुए थे। भगवान् श्रीकृष्ण जब धर्म, ज्ञान आदिके साथ अपने परमधामको पधार गये, तब इस कलियुगमें जो लोग अज्ञानरूपी अन्धकारसे अंधे हो रहे हैं, उनके लिये यह पुराणरूपी सूर्य इस समय प्रकट हुआ है। शौनकादि ऋषियो! जब महातेजस्वी श्रीशुकदेवजी महाराज वहाँ इस पुराणकी कथा कह रहे थे, तब मैं भी वहाँ बैठा था। वहीं मैंने उनकी कृपापूर्ण अनुमतिसे इसका अध्ययन किया। मेरा जैसा अध्ययन है और मेरी बुद्धिने जितना जिस प्रकार इसको ग्रहण किया है, उसीके अनुसार इसे मैं आपलोगोंको सुनाऊँगा॥ ४३—४५॥

यह अर्थ श्लोक 43–45 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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