॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.3.5
एतन्नानावताराणां निधानं बीजमव्ययम्।
यस्यांशांशेन सृज्यन्ते देवतिर्यङ्नरादयः॥ ५
etannānāvatārāṇāṃ nidhānaṃ bījamavyayam|
yasyāṃśāṃśena sṛjyante devatiryaṅnarādayaḥ|| 5
अर्थ
भगवान्का यही पुरुषरूप जिसे नारायण कहते हैं, अनेक अवतारोंका अक्षय कोष है—इसीसे सारे अवतार प्रकट होते हैं। इस रूपके छोटे-से-छोटे अंशसे देवता, पशु-पक्षी और मनुष्यादि योनियोंकी सृष्टि होती है॥ ५॥