श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.5.2

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

नारद उवाच

पाराशर्य महाभाग भवतः कच्चिदात्मना।

परितुष्यति शारीर आत्मा मानस एव वा॥ २

pārāśarya mahābhāga bhavataḥ kaccidātmanā|

parituṣyati śārīra ātmā mānasa eva vā|| 2

अर्थ

नारदजीने प्रश्न किया—महाभाग व्यासजी! आपके शरीर एवं मन—दोनों ही अपने कर्म एवं चिन्तनसे सन्तुष्ट हैं न? ॥ २॥

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