श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.5.30

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

ज्ञानं गुह्यतमं यत्तत्साक्षाद्भगवतोदितम्।

अन्ववोचन् गमिष्यन्तः कृपया दीनवत्सलाः॥ ३०

jñānaṃ guhyatamaṃ yattatsākṣādbhagavatoditam|

anvavocan gamiṣyantaḥ kṛpayā dīnavatsalāḥ|| 30

अर्थ

उन दीनवत्सल महात्माओंने जाते समय कृपा करके मुझे उस गुह्यतम ज्ञानका उपदेश किया, जिसका उपदेश स्वयं भगवान्‌ने अपने श्रीमुखसे किया है॥ ३०॥✎ 48 49

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #48 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #49 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें