श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.5.33

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

आमयो यश्‍च भूतानां जायते येन सुव्रत।

तदेव ह्यामयं द्रव्यं न पुनाति चिकित्सितम्॥ ३३

āmayo yaśca bhūtānāṃ jāyate yena suvrata|

tadeva hyāmayaṃ dravyaṃ na punāti cikitsitam|| 33

अर्थ

प्राणियोंको जिस पदार्थके सेवनसे जो रोग हो जाता है, वही पदार्थ चिकित्साविधिके अनुसार प्रयोग करनेपर क्या उस रोगको दूर नहीं करता?॥ ३३॥✎ 50 51 52

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #50 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #51 शब्दोंके बीचका स्थान: कोसमर्पित → को समर्पित
  • #52 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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