आकाशके समान अव्यक्त सर्वशक्तिमान् महान् परमात्मा इतना कहकर चुप हो रहे। उनकी इस कृपाका अनुभव करके मैंने उन श्रेष्ठोंसे भी श्रेष्ठतर भगवान्को सिर झुकाकर प्रणाम किया॥ २६॥✎ 555657
एतावदुक्त्वोपरराम तन्महद्
भूतं नभोलिङ्गमलिङ्गमीश्वरम्।
अहं च तस्मै महतां महीयसे
शीर्ष्णावनामं विदधेऽनुकम्पितः॥ २६
आकाशके समान अव्यक्त सर्वशक्तिमान् महान् परमात्मा इतना कहकर चुप हो रहे। उनकी इस कृपाका अनुभव करके मैंने उन श्रेष्ठोंसे भी श्रेष्ठतर भगवान्को सिर झुकाकर प्रणाम किया॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.6.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 105) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/6/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)