मुझे शुद्ध भगवत्पार्षद-शरीर प्राप्त होनेका अवसर आनेपर प्रारब्धकर्म समाप्त हो जानेके कारण पांचभौतिक शरीर नष्ट हो गया॥ २९॥✎ 5859606112801281
प्रयुज्यमाने मयि तां शुद्धां भागवतीं तनुम्।
आरब्धकर्मनिर्वाणो न्यपतत् पाञ्चभौतिकः॥ २९
मुझे शुद्ध भगवत्पार्षद-शरीर प्राप्त होनेका अवसर आनेपर प्रारब्धकर्म समाप्त हो जानेके कारण पांचभौतिक शरीर नष्ट हो गया॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.6.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 105) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/6/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)