श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.2

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

सूत उवाच

ब्रह्मनद्यां सरस्वत्यामाश्रमः पश्चिमे तटे।

शम्याप्रास इति प्रोक्त ऋषीणां सत्रवर्धनः॥ २

brahmanadyāṃ sarasvatyāmāśramaḥ paścime taṭe|

śamyāprāsa iti prokta ṛṣīṇāṃ satravardhanaḥ|| 2

अर्थ

श्रीसूतजीने कहा—ब्रह्मनदी सरस्वतीके पश्चिम तटपर शम्याप्रास नामका एक आश्रम है। वहाँ ऋषियोंके यज्ञ चलते ही रहते हैं॥ २॥✎ 1573

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1573 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: भक्ति-योग। → भक्तियोग।

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