श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.26

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

किमिदं स्वित्कुतो वेति देवदेव न वेद्म्यहम्।

सर्वतोमुखमायाति तेजः परमदारुणम्॥ २६

kimidaṃ svitkuto veti devadeva na vedmyaham|

sarvatomukhamāyāti tejaḥ paramadāruṇam|| 26

अर्थ

स्वयम्प्रकाशस्वरूप श्रीकृष्ण! यह भयंकर तेज सब ओरसे मेरी ओर आ रहा है। यह क्या है, कहाँसे, क्यों आ रहा है—इसका मुझे बिलकुल पता नहीं है!॥ २६॥

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