श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.35

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

मैनं पार्थार्हसि त्रातुं ब्रह्मबन्धुमिमं जहि।

योऽसावनागसः सुप्तानवधीन्‍निशि बालकान्॥ ३५

mainaṃ pārthārhasi trātuṃ brahmabandhumimaṃ jahi|

yo'sāvanāgasaḥ suptānavadhīnniśi bālakān|| 35

अर्थ

‘अर्जुन! इस ब्राह्मणाधमको छोड़ना ठीक नहीं है, इसको तो मार ही डालो। इसने रातमें सोये हुए निरपराध बालकोंकी हत्या की है॥ ३५॥✎ 66 67 68

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #66 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #67 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #68 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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