‘अर्जुन! इस ब्राह्मणाधमको छोड़ना ठीक नहीं है, इसको तो मार ही डालो। इसने रातमें सोये हुए निरपराध बालकोंकी हत्या की है॥ ३५॥✎ 666768
मैनं पार्थार्हसि त्रातुं ब्रह्मबन्धुमिमं जहि।
योऽसावनागसः सुप्तानवधीन्निशि बालकान्॥ ३५
‘अर्जुन! इस ब्राह्मणाधमको छोड़ना ठीक नहीं है, इसको तो मार ही डालो। इसने रातमें सोये हुए निरपराध बालकोंकी हत्या की है॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 110) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/7/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)