श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.52

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

निशम्य भीमगदितं द्रौपद्याश्‍च चतुर्भुजः।

आलोक्य वदनं सख्युरिदमाह हसन्‍निव॥ ५२

niśamya bhīmagaditaṃ draupadyāśca caturbhujaḥ|

ālokya vadanaṃ sakhyuridamāha hasanniva|| 52

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने द्रौपदी और भीमसेनकी बात सुनकर और अर्जुनकी ओर देखकर कुछ हँसते हुए-से कहा॥ ५२॥

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