श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.54

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

कुरु प्रतिश्रुतं सत्यं यत्तत्सान्त्वयता प्रियाम्।

प्रियं च भीमसेनस्य पाञ्चाल्या मह्यमेव च॥ ५४

kuru pratiśrutaṃ satyaṃ yattatsāntvayatā priyām|

priyaṃ ca bhīmasenasya pāñcālyā mahyameva ca|| 54

अर्थ

तुमने द्रौपदीको सान्त्वना देते समय जो प्रतिज्ञा की थी उसे भी सत्य करो; साथ ही भीमसेन, द्रौपदी और मुझे जो प्रिय हो, वह भी करो॥ ५४॥

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