श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.8

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

स संहितां भागवतीं कृत्वानुक्रम्य चात्मजम्।

शुकमध्यापयामास निवृत्तिनिरतं मुनिः॥ ८

sa saṃhitāṃ bhāgavatīṃ kṛtvānukramya cātmajam|

śukamadhyāpayāmāsa nivṛttinirataṃ muniḥ|| 8

अर्थ

उन्होंने इस भागवत-संहिताका निर्माण और पुनरावृत्ति करके इसे अपने निवृत्तिपरायण पुत्र श्रीशुकदेवजीको पढ़ाया॥ ८॥✎ 1573

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1573 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: भक्ति-योग। → भक्तियोग।

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