श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.15

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

यद्यप्यस्त्रं ब्रह्मशिरस्त्वमोघं चाप्रतिक्रियम्।

वैष्णवं तेज आसाद्य समशाम्यद् भृगूद्वह॥ १५

yadyapyastraṃ brahmaśirastvamoghaṃ cāpratikriyam|

vaiṣṇavaṃ teja āsādya samaśāmyad bhṛgūdvaha|| 15

अर्थ

शौनकजी! यद्यपि ब्रह्मास्त्र अमोघ है और उसके निवारणका कोई उपाय भी नहीं है, फिर भी भगवान् श्रीकृष्णके तेजके सामने आकर वह शान्त हो गया॥ १५॥

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