श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.3

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तत्रासीनं कुरुपतिं धृतराष्ट्रं सहानुजम्।

गान्धारीं पुत्रशोकार्तां पृथां कृष्णां च माधवः॥ ३

tatrāsīnaṃ kurupatiṃ dhṛtarāṣṭraṃ sahānujam|

gāndhārīṃ putraśokārtāṃ pṛthāṃ kṛṣṇāṃ ca mādhavaḥ|| 3

अर्थ

वहाँ अपने भाइयोंके साथ कुरुपति महाराज युधिष्ठिर, धृतराष्ट्र, पुत्रशोकसे व्याकुल गान्धारी, कुन्ती और द्रौपदी—सब बैठकर मरे हुए स्वजनोंके लिये शोक करने लगे। भगवान् श्रीकृष्णने धौम्यादि मुनियोंके साथ उनको सान्त्वना दी और समझाया कि संसारके सभी प्राणी कालके अधीन हैं, मौतसे किसीको कोई बचा नहीं सकता॥ ३-४॥

यह अर्थ श्लोक 3–4 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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