श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.9.16

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

न ह्यस्य कर्हिचिद्राजन् पुमान् वेद विधित्सितम्।

यद्विजिज्ञासया युक्ता मुह्यन्ति कवयोऽपि हि॥ १६

na hyasya karhicidrājan pumān veda vidhitsitam|

yadvijijñāsayā yuktā muhyanti kavayo'pi hi|| 16

अर्थ

ये कालरूप श्रीकृष्ण कब क्या करना चाहते हैं, इस बातको कभी कोई नहीं जानता। बड़े-बड़े ज्ञानी भी इसे जाननेकी इच्छा करके मोहित हो जाते हैं॥ १६॥✎ 1575

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1575 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: भीष्म-पितामहके → भीष्मपितामहके

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